Saturday, November 21, 2009

क्या आत्म-हत्या करना एक आखरी रास्ता हैं? नहीं भाई ! आप शादी भी कर सकते हैं........




नमस्कार साथियो !

हास्यकवि अलबेला खत्री एक बार फिर हाज़िर है

एक बार फिर कुछ चुटकियाँ ले ली ब्लोगर्स की.........,

आप भी मज़े लो......


लेकिन बताना ज़रूर कि कैसी रही............




Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
जब पैसा आता है, तो दिमाग कहाँ चला जाता है ?

__क्लब की मैम्बरशिप लेने....



Rector Kathuria
हजारों कुर्सियां ऐसी कि हर कुर्सी पे दम निकले, जो इस पे बैठ कर खुद से उठे हों ऐसे कम निकले

__इधर देखो तो व्हिस्की है, उधर देखो तो रम निकले, मगर नकली ही नकली है यहाँ असली तो कम निकले






ऐसे 42 या उससे भी अधिक राष्‍ट्रीय प्रतीक हो सकते हैं ... जिनपर हम गर्व कर सकते है !!

__लेकिन वैसे तो बेहिसाब हैं जिन पर हम शर्म कर सकते हैं
vinay bihari singh
प्रदूषण से कैसे नुकसान होता है हमारा

__बाज़ार से रसगुल्ला खरीदते हैं, घर पहुँचते पहुँचते गुलाब जामुन हो जाता है ससुरा........



पंख मेरे झड़ रहे हैं ....

__फिर भी नैना लड़ रहे हैं



मानवता के दुश्मन ब्लोगिंग से दूर रहें.
इटली की एक रोचक घटना

__ब्याह करके दिल्ली में गई और हिट हो गई



रेखा श्रीवास्तव
रचनाधर्मिता क्या है और क्या कहती है?
Kusum Thakur
तस्लीमा अब भी बंगलादेश लौटना चाहती हैं !!

__ताकि ख़बरों में बनी रहे...........



शारदा अरोरा
कुछ भी नहीं पूछा है उसने

__सीधा बिल थमा दिया गैराज का


Anil Pusadkar
अबे,तो अभी क्या कर रहा हूं?

__मज़े के लिए पैदा हुआ हूँ , मज़े कर रहा हूँ........
mehhekk
हिन्दी बोलिये और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाइए

__लेकिन मुम्बई में हैं तो मराठी बोलिये और सुरक्षित हो जाइये



हिंदी-अंग्रेजी के अख़बारों का किसान अलग क्यों होता है

__क्योंकि हिन्दी पत्रकार बीड़ी पीते हैं, उन्हें चैनल की तरफ़ से सिगरेट का पैकेट नहीं मिलता है


रचना दीक्षित
हमसफ़र

दम तोड़ती संस्कृति

__विकृतियों की काम वाली बाई बन कर रह जाए दोस्तों !



जी.के. अवधिया
वाह रे माया सभ्यता! खुद के मरने खपने की तो खबर नहीं थी और पृथ्वी के अंत का भविष्यवाणी कर गये ...

__माया का काम ही है भरमाना...........इसकी बातों में अपने को नहीं आना........



ज़ाकिर अली ‘रजनीश
भेड़ है बकरी देश की जनता रोज उतारें खाल मियाँ।

__खाओ-पीओ मज़े करो और खूब कमाओ माल मियाँ



आज राकेश खण्डेलवाल की वैवाहिक वर्षगांठ है

__बधाई ऐसी दो कि गीत कोई अनमोल बन जाए.........


ambrish kumar
खाली हाथ नहीं लौटा किसान

__सल्फांस की गोलियां मिल गई थीं उसे.........


अन्ताक्षरी ३ गीतो भरी

__सारे फुरसती लोग चटाई बिछाके बैठ जाओ........
आंसुओं में तैरते ख्वाब

__पकौड़ों की तरह खाये नहीं जा सकते.........

राजकुमार ग्वालानी
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

6 comments:

शरद कोकास said...

अलबेला भाई आपकी चुटकीबाज़ी रंग ला रही है .. बधाई ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपने तो चुटकी-चुटकी में ही
सबकी खबर ले ली है।

जी.के. अवधिया said...

मस्त चुटकी!

"क्या आत्म-हत्या करना एक आखरी रास्ता हैं? नहीं भाई ! आप शादी भी कर सकते हैं........"

पागल हैं क्या जो एक बार मरना छोड़ कर सारी जिन्दगी मरते रहें? :-)

अजय कुमार झा said...

अलबेला भाई ,
चुटकियों में सही चिकोटी काटी ....
अजय कुमार झा

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अल्बेला जी की अल्बेली चर्चा :)
मजेदार्!!

Rector Kathuria said...

आप तो नयी जान दाल रहे है अलबेला जी...बहुत खूब..डटे रहिये....ब्लोगिंग का मज़ा कई गुना बाद जायेगा...और दायरा भी.......